Thursday, June 13, 2024

दूध एक संपूर्ण पोषक पौष्टिक फूड

पौष्टिक फूड दूध से नुकसान भी पहुंचा सकता है, एक्सपर्ट क्या कहता हे

दूध में संपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यही कारण है कि शिशु जन्म लेने से लेकर 6 महीने तक की उम्र तक सिर्फ मां के दूध पर ही निर्भर रहता है। हालांकिमां का दूध और गाय-भैस के दूध में अंतर होता हैपर हम जो दूध पीते हैं वह भी कम पौष्टिक नहीं होता है। अगर शुद्ध दूध हो तो सिर्फ 250 ग्राम में 8.14 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। वहीं 12 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 12 ग्राम शुगर और 8 ग्राम फैट पाया जाता है। इसके अलावा कैल्शियम और कई तरह के विटामिन भी होते हैं। इतने दूध से आपको 152 कैलोरी ऊर्जा मिल सकती है। इसलिए समझा जा सकता है कि दूध हमारे लिए कितना पौष्टिक तत्व है।

कुछ लोगों के लिए दूध सही डाइट नहीं होता है

इसका मुख्य कारण है लैक्टोज असहिष्णुता (लैक्टोज इनटोलरेंस) लैक्टोज असहिष्णुता तब होती है जब किसी व्यक्ति का शरीर लैक्टोज नामक शुगर को पचाने के लिए आवश्यक एंजाइम (लैक्टेज) का उत्पादन नहीं कर पाता। लैक्टोजदूध और अन्य डेयरी उत्पादों में पाया जाता है। इस समस्या के कारणजब ऐसे लोग दूध पीते हैंतो उन्हें पेट में दर्दगैसपेट फूलनाऔर दस्त जैसी समस्याएं होती हैं।

दूसरा कारण एलर्जी हो सकती है। कुछ लोगों को दूध में मौजूद प्रोटीन से एलर्जी होती हैजिससे उनके शरीर में प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं होती हैं। इसके अलावाकुछ लोग दूध के अन्य घटकों के प्रति संवेदनशील हो सकते हैंजिससे भी उन्हें परेशानी हो सकती है। इन परिस्थितियों मेंडॉक्टर से परामर्श करना और वैकल्पिक स्रोतों से आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। दूध के स्थान पर सोया दूधबादाम का दूधया अन्य पौधों पर आधारित दूध का सेवन किया जा सकता है।

दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन भी कुछ लोगों को एलर्जी का कारण बन सकते हैं। ऐसे लोगों को अन्य पोषक तत्वों के स्रोतों से दूध की व्यवस्थित रूप से प्राप्ति करना अहम होता है। सोया दूधबादाम का दूधऔर अन्य पौधों से बने दूध को अकेले या मिश्रण रूप में सेवन करने से वे भी उत्पादों के साथ सही मात्रा में पोषण प्राप्त कर सकते हैं।

दूध शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण 

दूध एक प्रमुख पोषक आहार है जो हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। दूध में प्रोटीनकार्बोहाइड्रेटफैटकैल्शियमविटामिनऔर अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं जो हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक होते हैं। शिशुओं के लिए मां का दूध सबसे पूर्ण पोषक खाद्य है जो उनकी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करता है। हालांकिविभिन्न कारणों से कुछ लोग दूध को प्रभावित कर सकते हैं। एक कारण लैक्टोज असहिष्णुता हैजिसमें व्यक्ति का शरीर लैक्टोज को पचाने के लिए आवश्यक एंजाइम नहीं उत्पन्न कर पाता है। इसके परिणामस्वरूपउन्हें दूध पाचन संक्रमण और एलर्जिक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। हमें कई आवश्यक पोषक तत्व और ऊर्जा प्रदान करता है। हालांकिकुछ व्यक्ति ऐसे हो सकते हैं जिन्हें दूध सही डाइट नहीं होता हैऔर इसका कारण अलर्जी या लैक्टोज असहिष्णुता हो सकता है। इसलिएउन्हें डॉक्टर से परामर्श करना और वैकल्पिक स्रोतों से पोषण प्राप्त करना चाहिए।

दूध के महत्व को समझने और सही रूप से इस्तेमाल करने से हम स्वस्थ और मजबूत रह सकते हैं। इसलिएदूध को अपनी डाइट में शामिल करना और उसके साथ-साथ अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल बताते हैं

सीके बिड़ला अस्पताल गुड़गांव में इंटरनल मेडिसीन के कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल बताते हैं कि भारत में ज्यादातर लोगों को मिल्क इंटलॉरेंस है. यानी दूध को पचाने के लिए बर्दाश्त करने की क्षमता नहीं है. इसके पीछे कारण यह है कि दूध में लेक्टोज नाम का कंपाउड होता है. इसे पचाने के लिए लैक्टीज इंजाइम की जरूरत होती है. अधिकांश भारतीय में यह एंजाइम बनता ही नहीं है या बनता है तो बहुत कम बनता है. इसलिए ऐसे लोगों को दूध पीते ही पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगती है. डॉ. तुषार तायल ने कहा कि इसके लिए हमारा जीन जिम्मेदार होता है. कुछ लोगों में जीन की गड़बड़ियों के कारण लैक्टीज एंजाइम बनाने का आदेश मिलता ही नहीं है |

इसके पीछे का कारण

डॉ. तुषार तायल ने बताया कि जीन की गड़बड़ी इसके पीछे प्रमुख कारण तो है ही. इसके साथ ही आजकल जो दूध रहा हैउसमें कृत्रिम केमिकल भी मिले होते हैं. पहले के जमाने में ऐसा नहीं होता था. शुद्ध दूध मिलता था जिससे ज्यादातर लोग दूध को आसानी से पचा लेते थे. आजकल नकली दूध भी खूब आने लगा है. इसमें यूरिया जैसे रसायन पाए जा सकते हैं. दूसरी ओर गाय-भैंस में ऑक्सिटोसिन जैसे इंजेक्शन देकर दूध निकाला जाता है. ऑक्सिटोसिन एक हार्मोन है जो दूध के माध्यम से इंसान के शरीर में सकते हैं. जब यह इंसान के शरीर में पहुंचता है तो शरीर में पैदा होने वाला कुदरती हार्मोन बनने में दिक्कत होती है. इतने सारी मिलावटी चीजों के दौर में हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते हैं कि दूध शुद्ध है या नहीं. इसलिए हमलोग आमतौर पर दूध लेने की सलाह कम ही देते हैं.

दूध न पचने पर शरीर में दिखते हैं संकेत

अगर किसी को मिल्क इंटलॉरेंस है तो दूध पीते ही पाचन शक्ति गड़बड़ाने लगेगा. इससे पेट फूल सकता हैएक तरह से पेट में अफारा होने लगेगा. पेट में गैस बहुत बनने लगेगी. खाने के बाद पेट में मरोड़ हो सकता है. डकारें बहुत आएगी. लूज मोशन या कॉन्स्टिपेशन भी हो सकता है. कुछ दिनों तक लगातार ऐसा होने से प्रोडक्टिविटी कम होने लगेगी और काम पर असर पड़ेगा. डॉ. तुषार तायल ने बताया कि ये सब दूध के कारण हो रहा है या नहींइसे जानने के लिए कुछ दिनों तक दूध पीना बंद कर दीज्ए और इसके बाद इसकी जगह प्लांट बेस्ड दूध का सेवन कीजिए. प्लांट बेस्ड दूध में आप ओट्स मिल्क या अल्मंड मिल्क का सेवन कर सकते हैं. अगर इससे पेट से संबंधित परेशानियां नहीं है तो समझिए कि आपको मिल्क इंटॉलरेंस है. अगर इसके बाद भी पेट खराब होता है तो इसका मतलब है कि आपको पाचन संबंधित गड़बड़ियां हैं. इसके लिए आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए |


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