नई सरकार बनने के बाद शेयर बाजार ने रचा इतिहास भारत बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार
भारत के शेयर बाजार ने हाल ही में एक
महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नई सरकार के गठन के बाद, भारतीय शेयर बाजार ने एक नया इतिहास रचा है। इस समय भारत दुनिया का
चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है, जिसकी कुल बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गई है। इस
उपलब्धि के पीछे कई कारण हैं। पहला, नई सरकार के आने से निवेशकों में भरोसा बढ़ा है। दूसरा, भारत की आर्थिक वृद्धि दर में सुधार आया है, जिससे कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। तीसरा, भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ी है, जिससे बाजार पूंजीकरण में वृद्धि हुई है।
इस उपलब्धि से भारत
की वैश्विक प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का
प्रतीक है। साथ ही, यह भारत के शेयर बाजार की वैश्विक स्थिति को भी दर्शाता है।
भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में
एनडीए की सरकार का पुनर्गठन
मोदी सरकार के पिछले पांच साल के
कार्यकाल में भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी आर्थिक और
विकास नीतियों ने देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मोदी सरकार द्वारा शुरू की
गई कई महत्वपूर्ण योजनाएं और सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी साबित हुए
हैं।
इनमें से कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं और सुधारों की चर्चा इस प्रकार है
1. जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का
क्रियान्वयन: मोदी सरकार ने अप्रैल 2016 में जीएसटी कानून को लागू किया, जिससे देश में एक समान कर व्यवस्था का निर्माण हुआ। यह कदम भारतीय
अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण था और इससे कराधान प्रक्रिया में पारदर्शिता
और कारोबार करने में आसानी आई।
2. डिजिटल भुगतान को बढ़ावा: मोदी
सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए। इसमें यूपीआई (एकीकृत
भुगतान इंटरफ़ेस), भीम ऐप, रुपे कार्ड आदि शामिल हैं। इन पहलों से भारत में कैशलेस
अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है।
3. स्वच्छ भारत अभियान: मोदी सरकार ने
2014 में स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य देश को स्वच्छ और साफ-सुथरा बनाना था। इस अभियान ने
देशभर में स्वच्छता और स्वच्छता के महत्व को बढ़ावा दिया है।
4. आयुष्मान भारत योजना: मोदी सरकार
ने 2018 में आयुष्मान भारत योजना शुरू की, जो दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना है। इस
योजना से लाखों गरीब परिवारों को स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं मिल रही हैं।
5. मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप
इंडिया: मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया जैसी पहलों को गति दी, जिससे देश में उद्योग और कारोबार को बढ़ावा मिला है। इन पहलों से
देश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
इन सभी पहलों और नीतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था को
काफी लाभ पहुंचा है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी इन नीतियों और सुधारों
को जारी रखने की उम्मीद है, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि और तेज होगी। इसके अलावा, नई सरकार के गठन के बाद से शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखी गई है और भारत का
शेयर मार्केट वैल्यू पहली बार 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह भारत के
आर्थिक विकास और भविष्य के लिए एक अच्छा संकेत है।
ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत का इक्विटी मार्केट पिछले कुछ महीनों में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव का
सामना कर रहा है। डेटा के मुताबिक, देश का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सप्ताह में 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर
को पार कर गया है, जिससे भारत को दुनिया के सबसे बड़े इक्विटी मार्केटों में से एक के रूप में
स्थान मिला है।
यह उपलब्धि भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। विगत
छह महीनों के दौरान, भारतीय कंपनियों ने अपने शेयरों की कीमतों में तेजी से वृद्धि दर्ज की है, जिसके परिणामस्वरूप देश के इक्विटी मार्केट में इस तरह की उल्लेखनीय वृद्धि
हुई है।
यह वृद्धि कई कारकों से प्रेरित है, जिनमें से प्रमुख हैं: भारतीय अर्थव्यवस्था में निरंतर सुधार, कॉर्पोरेट लाभप्रदता में सुधार, उच्च विदेशी पोर्टफोलियो निवेश और सरकार द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण सुधार
कार्य। इन कारकों ने मिलकर भारतीय पूंजी बाजार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई है।
साथ ही, भारत का उभरता हुआ प्रौद्योगिकी क्षेत्र भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका
निभा रहा है। टेक कंपनियों के शेयरों में तेजी से वृद्धि ने कुल मार्केट
कैपिटलाइजेशन में काफी योगदान दिया है। उदाहरण के लिए, भारत के सबसे बड़े ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट का मूल्यांकन पिछले कुछ वर्षों
में काफी बढ़ गया है।
इसके अलावा, भारतीय पूंजी बाजार में अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें से एक है निजी क्षेत्र की कंपनियों का सार्वजनिक रूप से शेयर बाजार
में सूचीकरण। इससे कई नई कंपनियों का मार्केट में प्रवेश हुआ है, जिससे कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में वृद्धि हुई है।
हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार के इस विस्तार और विकास में कुछ चुनौतियां भी हैं। उदाहरण
के लिए, बाजार में अत्यधिक
अस्थिरता, उच्च मूल्यांकन और कुछ
क्षेत्रों में अत्यधिक भीड़ जैसी समस्याएं हैं। सरकार और नियामक निकाय इन मुद्दों
पर ध्यान देना जारी रखेंगे ताकि भारतीय पूंजी बाजार को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय
बनाया जा सके।
समग्र रूप से, ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का इक्विटी
मार्केट एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर चुका है। यह देश के आर्थिक विकास और
उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र की ताकत का प्रतीक है। हालांकि, बाजार की स्थिरता और मूल्यांकन पर नजर रखने की आवश्यकता है, लेकिन इस उपलब्धि से भारत के पूंजी बाजार की क्षमता और भविष्य की संभावनाएं
स्पष्ट हो जाती हैं।
भारतीय शेयर बाजार: दुनिया का चौथा सबसे बड़ा इक्विटी बाजार
भारतीय शेयर बाजार का मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.21 ट्रिलियन
डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि हांगकांग शेयर बाजार का मार्केट कैप 5.17 ट्रिलियन
डॉलर है। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह देश की आर्थिक ताकत को दर्शाता
है। भारतीय शेयर बाजार का उदय कई कारणों से हुआ है। पिछले कुछ
वर्षों में, भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है और कई बड़ी कंपनियों ने अपने
शेयरों को सूचीबद्ध किया है। इसके अलावा, भारत में निवेशकों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है, जिससे बाजार का आकार बढ़ा है।
भारतीय शेयर बाजार की सफलता में कई अन्य कारक भी शामिल हैं।
सरकार ने कई नीतिगत सुधार किए हैं, जिनमें से कुछ शामिल हैं - कंपनियों को सूचीबद्ध होने के
लिए प्रोत्साहित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों के लिए गारंटियां प्रदान
करना। इन सुधारों ने बाजार को मजबूत और विश्वसनीय बनाया है। भारतीय शेयर बाजार की
यह उपलब्धि केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे वैश्विक वित्तीय प्रणाली के लिए भी महत्वपूर्ण
है। यह भारत की आर्थिक ताकत और उभरते बाजारों की भूमिका को दर्शाता है। इससे अन्य
देशों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे भी अपने शेयर बाजारों को विकसित करने के लिए
प्रेरित होंगे।
भविष्य में, भारतीय शेयर बाजार की और भी वृद्धि होने की उम्मीद है। देश
की आर्थिक वृद्धि, नए उद्योगों का उदय और निवेशकों की बढ़ती रूचि, इस बाजार को और मजबूत करेंगे। साथ ही, सरकार द्वारा किए जाने वाले नीतिगत सुधार भी इसके विकास को
और गति देंगे। इस प्रकार, भारतीय शेयर बाजार का चौथा सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बनना एक
महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह भारत की आर्थिक ताकत और उभरते बाजारों की महत्वपूर्ण
भूमिका को दर्शाता है। इस उपलब्धि से न केवल देश, बल्कि पूरी वैश्विक वित्तीय प्रणाली को लाभ होगा।
देश कैपिटलाइजेशन की दृष्टि से: सबसे ऊपर कौन?
दुनिया के सबसे अधिक कैपिटलाइज़्ड देशों की सूची पर नजर
डालें तो हम देखते हैं कि अमेरिका सबसे ऊपर है। अमेरिका की कुल बाजार पूंजीकरण
56.49 ट्रिलियन डॉलर है। यह दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 260% है।
चीन दूसरे स्थान पर है, जिसकी कुल कैपिटलाइजेशन 8.84 ट्रिलियन डॉलर है। यह चीन की
जीडीपी का लगभग 64% है। चीन में कई बड़ी कंपनियां हैं जिनका शेयर मूल्य काफी उच्च
है, जैसे अलीबाबा, टेंसेंट और बीजिंग-बेस्ड कंपनियां।
जापान तीसरे स्थान पर है, जिसकी कुल बाजार पूंजीकरण 6.30 ट्रिलियन डॉलर है। जापान की
अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसमें कई बड़ी
कंपनियां हैं जैसे टोयोटा, सोनी और निप्पन स्टील।
भारत चौथे स्थान पर है, जिसकी कुल कैपिटलाइजेशन 5.21 ट्रिलियन डॉलर है। भारत में कई
बड़ी कंपनियां हैं जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और टाटा समूह की कंपनियां।
हांगकांग पांचवें स्थान पर है, जिसकी कुल कैपिटलाइजेशन 5.17 ट्रिलियन डॉलर है। हांगकांग एक
वित्तीय केंद्र है और यहां कई बड़ी वैश्विक कंपनियों की शाखाएं हैं।
इस तरह हम देखते हैं कि अमेरिका सबसे ऊपर है, इसके बाद चीन, जापान, भारत और हांगकांग का स्थान है। ये देश अपनी विशाल और उन्नत अर्थव्यवस्था के
कारण दुनिया के सबसे अधिक कैपिटलाइज़्ड देश हैं।
सबसे ज्यादा कैपिटलाइजेशन वाले देश
देश
कैपिटलाइजेशन
अमेरिका
56.49 ट्रिलियन डॉलर
चीन
8.84 ट्रिलियन डॉलर
जापान
6.30 ट्रिलियन डॉलर
भारत
5.21 ट्रिलियन डॉलर
हांगकांग
5.17 ट्रिलियन डॉलर




