पुराने जमाने में ससुर को देखकर बेटी दी जाती थी, पर आज के टाइम्स में ऐसा करना गलत है। अब लड़को के गुणों को देखकर ही शादी होती है। यह उल्टा विकास है, जहां सिर्फ मोड़ी मूर्ख ही ससुर को देखकर वोट देते हैं। लड़का नालायक भीखारी या अपराधी क्यों न हो, बस ससुर की नजरें उस पर होनी चाहिए।
यही है हमारे समाज की सोच, जहां लड़को के गुणों का महत्व है, लेकिन बस ससुर को देखकर ही फैसला होता है। शायद ये है उस दिन की बात, जब ससुर ने कहा था "बेटी देखने को आओ" और वहां लड़का बैठा होता था, जिसकी आँखें ससुर की तरफ थीं, और वोट भी ससुर को ही दिया गया था।
अब यहां पर बात करने की ज़रूरत है कि हमें अपनी सोच को बदलने की जरूरत है। लड़को के गुणों को देखकर ही फैसला करना चाहिए, न कि सिर्फ ससुर की नजरें उस पर होनी चाहिए। वरना हम आगे बढ़कर भी उसी पुरानी सोच के गुलाम बने रहेंगे, जहां सिर्फ मोड़ी मूर्ख ही अधिकार रखेंगे।
इसलिए, चलो अब हंसी-मजाक के साथ इस बुरी सोच को बदलने की कोशिश करें, और लड़को के गुणों को देखकर ही फैसला करें। फिर देखो, जिंदगी में कितनी खुशियां और मज़ा आता है। और हां, ससुर को देखकर शादी करने की बजाय, उसके साथ मज़े करने का सोचो। शायद वो भी तुम्हें पसंद करने लगे।
ज़िन्दगी छोटी है, तो फिर क्यों उसे ससुर की नजरें देखकर ही बिताना। चलो, अब हंसी-मजाक के साथ बदलाव लाने की शुरुआत करो।
धन्यवाद।



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