सरकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार का चलन, शिकायत में कोई सुनवाई न होना और शिकायत करने वाले को प्रतारित करना
राजकीय कार्यालयों में भ्रष्टाचार का कालाकोठरी जैसा चलन चल रहा है। लोग अपनी आवश्यक सेवाएं प्राप्त करने के लिए हर रोज संघर्ष कर रहे हैं।
कार्मिक कई बार लिपिक से लेकर उच्च अधिकारियों तक रिश्वत मांगते हैं। जब कोई नागरिक इसकी शिकायत करता है तो उसकी सुनवाई नहीं होती।
शिकायत करने वाले को प्रतारित कर दिया जाता है। उन्हें कार्यालय में लगातार परेशान किया जाता है, उनके कार्यों को जान-बूझकर देरी से पूरा किया जाता है या फिर उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें परेशान किया जाता है।
नतीजतन, भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच जाता है और आम नागरिकों का विश्वास सरकारी व्यवस्था पर गिरता जा रहा है।
ऐसी स्थिति में, जब अधिकारियों द्वारा लगातार शिकायतों को दरकिनार किया जाता है और शिकायतकर्ताओं को प्रतारित किया जाता है, तो एक आक्रोश और नाराजगी भी जन्म लेती है।
इस समस्या को तुरंत संज्ञान में लिया जाना चाहिए और इसके समाधान के लिए कड़े कदम उठाये जाने चाहिए। नहीं तो, भ्रष्टाचार और लोगों का सरकार पर विश्वास टूटता जाएगा।

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