Saturday, June 22, 2024

ब्लॉग फ्री में कैसे बनाये

ब्लॉग व्यक्तिओं को अपने बिचार और अनुभवों को साझा करने का मंच 

यह एक आम धारणा है कि ब्लॉगिंग केवल एक व्यक्तिगत डायरी लिखने या अपने विचारों को साझा करने का तरीका है। हालांकि
, ब्लॉगिंग का दायरा काफी व्यापक है और इसका उपयोग कई अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

सबसे पहले, ब्लॉग क्या है? ब्लॉग एक वेबसाइट या वेब पेज है जहां किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा नियमित रूप से लेख या पोस्ट किए जाते हैं। ये पोस्ट किसी भी विषय पर हो सकते हैं, जैसे व्यक्तिगत विचार, व्यवसाय के बारे में जानकारी, या किसी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञता।

ब्लॉगिंग के कई लाभ हैं। पहला, यह लोगों को अपने विचारों और अनुभवों को साझा करने का एक मंच प्रदान करता है। यह सामुदायिक संवाद और जुड़ाव को बढ़ावा देता है। दूसरा, ब्लॉगिंग व्यवसायों के लिए एक महत्वपूर्ण विपणन और प्रचार उपकरण है। यह ग्राहकों के साथ संवाद करने और अपने ब्रांड को बढ़ावा देने में मदद करता है। इसके अलावा, ब्लॉगिंग व्यक्तियों को अपनी लेखन, संचार और विश्लेषण कौशल को विकसित करने का अवसर प्रदान करता है। यह उन्हें एक विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करने में भी मदद कर सकता है।

संक्षेप में, ब्लॉगिंग एक बहुत ही लचीला और बहुमुखी माध्यम है। यह व्यक्तियों और व्यवसायों दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है। चाहे आप अपने व्यक्तिगत विचारों को साझा करना चाहते हैं या अपने ब्रांड को बढ़ावा देना चाहते हैं, ब्लॉगिंग एक शक्तिशाली और प्रभावी तरीका है।

1.  साइन इन करें

यह है एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट हिंदी में, जिसका विषय है "Blogger में साइन इन करें":

Blogger में साइन इन करना: आसान और उपयोगी गाइड

क्या आप एक नया ब्लॉग शुरू करना चाहते हैं? या फिर अपने मौजूदा ब्लॉग को बेहतर बनाना चाहते हैं? अगर हां, तो Blogger प्लेटफॉर्म एक बहुत ही उपयोगी और आसान विकल्प है। Blogger एक मुफ्त और सरल ब्लॉगिंग टूल है, जिसका इस्तेमाल करके आप अपना खुद का ब्लॉग बना सकते हैं और उसे आसानी से प्रबंधित कर सकते हैं।

इस ब्लॉग पोस्ट में, हम आपको Blogger में साइन इन करने की एक विस्तृत और कदम-दर-कदम गाइड प्रदान करने जा रहे हैं, ताकि आप अपने ब्लॉग को शुरू करने में मदद मिले।

Blogger में कैसे साइन इन करें?

Blogger में साइन इन करने के लिए, आपको सबसे पहले Google खाते में साइन इन करना होगा। यदि आपके पास पहले से ही Google खाता है, तो आप सीधे Blogger.com पर जा सकते हैं। अगर नहीं, तो आपको Google खाता बनाना होगा।

Google खाता बनाने के लिए, आप Google.com पर जा सकते हैं और "Sign In" पर क्लिक कर सकते हैं। यहां आपको "Create account" का विकल्प दिखाई देगा, जिस पर क्लिक करके आप अपना नया Google खाता बना सकते हैं। अब जब आपका Google खाता तैयार है, तो आप Blogger.com पर जा सकते हैं और "Sign In" पर क्लिक कर सकते हैं। यहां आपको अपने Google खाते के साथ साइन इन करना होगा।

साइन इन करने के बाद, आपको Blogger डैशबोर्ड दिखाई देगा। यह वह जगह है जहां आप अपने ब्लॉग को बनाने, प्रबंधित करने और अपडेट करने की शुरुआत कर सकते हैं। 

2. Blogger डैशबोर्ड का इस्तेमाल कैसे करें? 

Blogger डैशबोर्ड बहुत ही उपयोगी और सरल है। यहां आप अपने ब्लॉग के लिए विभिन्न सेटिंग्स को कॉन्फ़िगर कर सकते हैं, नए पोस्ट लिख सकते हैं, मीडिया फ़ाइलें अपलोड कर सकते हैं और बहुत कुछ कर सकते हैं।

डैशबोर्ड के अंदर, आप निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:

1. नया ब्लॉग बनाना: "New Blog" बटन पर क्लिक करके आप एक नया ब्लॉग बना सकते हैं। यहां आप ब्लॉग का नाम, थीम और अन्य सेटिंग्स को कॉन्फ़िगर कर सकते हैं।

2. पोस्ट लिखना: "New Post" बटन पर क्लिक करके आप एक नया पोस्ट लिख सकते हैं। यहां आप पोस्ट का शीर्षक, विषय-वस्तु, मीडिया फ़ाइलें और अन्य सेटिंग्स को कॉन्फ़िगर कर सकते हैं।

3. मीडिया फ़ाइलें अपलोड करना: "Photos/Videos" टैब पर क्लिक करके आप अपने ब्लॉग में इस्तेमाल करने के लिए चित्र, वीडियो और अन्य मीडिया फ़ाइलें अपलोड कर सकते हैं।

4. सेटिंग्स कॉन्फ़िगर करना: "Settings" टैब पर क्लिक करके आप अपने ब्लॉग की विभिन्न सेटिंग्स को कॉन्फ़िगर कर सकते हैं, जैसे थीम, अनुकूलन, अनुमतियां आदि।

5. विश्लेषण देखना: "Analytics" टैब पर क्लिक करके आप अपने ब्लॉग के विश्लेषण देख सकते हैं, जैसे ट्रैफ़िक, पेज व्यू, रीडर गतिविधि आदि।

इन सुविधाओं का उपयोग करके, आप अपने ब्लॉग को आसानी से बना सकते हैं, प्रबंधित कर सकते हैं और उसे बढ़ावा दे सकते हैं।

Blogger में साइन इन करने के कई लाभ हैं

1. मुफ़्त और आसान: Blogger एक मुफ्त और बहुत ही सरल ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म है, जिसका उपयोग करके आप अपना ब्लॉग बना सकते हैं।

2. कुशल प्रबंधन: Blogger डैशबोर्ड में आप अपने ब्लॉग को आसानी से प्रबंधित कर सकते हैं, जैसे नए पोस्ट लिखना, मीडिया फ़ाइलें अपलोड करना और सेटिंग्स कॉन्फ़िगर करना।

3. कस्टमाइज़ेशन: Blogger में आप अपने ब्लॉग को कस्टमाइज़ कर सकते हैं, जैसे थीम, लेआउट और ब्रांडिंग।

4. एनालिटिक्स: Blogger आपको अपने ब्लॉग के विश्लेषण देखने की सुविधा प्रदान करता है, ताकि आप अपने ऑडियंस को बेहतर समझ सकें।

5. एसईओ: Blogger में बिल्ट-इन एसईओ सुविधाएं हैं, जो आपके ब्लॉग की रैंकिंग और ट्रैफ़िक को बढ़ाने में मदद करती हैं।

इन लाभों के साथ, Blogger एक बहुत ही शक्तिशाली और उपयोगी ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है। अब जब आप Blogger में साइन इन करने का तरीका जान चुके हैं, तो आप अपना खुद का ब्लॉग शुरू कर सकते हैं और इसका लाभ उठा सकते हैं।

 बाईं ओर, 'नीचे की ओर तीर वाले निशान' पर क्लिक करें.

ब्लॉग में बाईं ओर पाए जाने वाले 'नीचे की ओर तीर वाले निशान' का उद्देश्य और महत्व

ब्लॉग का प्रारूप और लेआउट एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिससे पाठकों को सामग्री को समझने और नेविगेट करने में मदद मिलती है। ब्लॉग के बाईं ओर अक्सर 'नीचे की ओर तीर वाले निशान' देखा जाता है, जिसका उद्देश्य और महत्व कई पाठकों के लिए स्पष्ट नहीं होता है। इस निशान का मुख्य उद्देश्य पाठकों को ब्लॉग में और अधिक सामग्री तक पहुंचने में मदद करना है। जब पाठक इस निशान पर क्लिक करते हैं, तो वे ब्लॉग के नीचे की ओर स्क्रॉल करते हैं, जहां सामग्री का अधिक भाग मौजूद होता है। यह विशेष रूप से लंबे ब्लॉग पोस्ट के मामले में उपयोगी हो सकता है, जहां पाठकों को पूरी सामग्री तक पहुंचने के लिए नीचे स्क्रॉल करना पड़ता है।

इस निशान का उपयोग ब्लॉग की संरचना और नेविगेशन को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। यह पाठकों को ब्लॉग में अधिक से अधिक सामग्री तक पहुंचने में मदद करता है और उन्हें ब्लॉग के अंत तक पहुंचने में प्रोत्साहित करता है। इससे पाठकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने में मदद मिलती है और उन्हें ब्लॉग पर लंबे समय तक बने रहने के लिए प्रोत्साहित करता है।

इस प्रकार, 'नीचे की ओर तीर वाले निशान' ब्लॉग में एक महत्वपूर्ण तत्व है जो पाठकों को ब्लॉग की नेविगेशन और संरचना को समझने में मदद करता है और उन्हें अधिक से अधिक सामग्री तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका है जिसका उपयोग ब्लॉग के प्रभावी प्रस्तुतीकरण के लिए किया जा सकता है।

3. नया ब्लॉग पर क्लिक करें

आप नए ब्लॉग पर क्लिक करके एक नए और उत्साहजनक अनुभव का आनंद ले सकते हैं। ब्लॉगिंग एक लोकप्रिय और बढ़ता हुआ माध्यम है जो लोगों को अपनी आवाज़ को प्रदर्शित करने और दूसरों से जुड़ने का एक अद्भुत अवसर प्रदान करता है। नया ब्लॉग पर क्लिक करके आप एक नए और रोचक विषय में डुबक्की लगा सकते हैं। यह आपको अपने रुझानों और रुचियों के अनुसार विषयों की एक विस्तृत श्रंखला के माध्यम से घूमने का मौका देता है। चाहे आप व्यक्तिगत विषयों पर लिखना पसंद करते हों या फिर व्यवसाय, प्रौद्योगिकी, या राजनीति जैसे विषयों पर अपनी राय व्यक्त करना चाहते हों, आप हर तरह के विषय को खोज और अन्वेषण कर सकते हैं। 

एक नए ब्लॉग पर क्लिक करके आप न केवल नए साहित्य का आनंद ले सकते हैं,

बल्कि अन्य लेखकों और पाठकों के साथ भी जुड़ सकते हैं। ब्लॉगिंग एक संचार का शक्तिशाली माध्यम है जो लोगों को आपस में जोड़ता है और विचारों का आदान-प्रदान करता है। आप अपने पसंदीदा लेखकों के साथ जुड़ सकते हैं, उनके विचारों पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं और खुद भी नया लिखित सामग्री साझा कर सकते हैं। इस प्रकार, नया ब्लॉग पर क्लिक करके आप एक नया और उत्साहजनक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं जो आपको नए विषयों के साथ संलग्न होने और अन्य लेखकों के साथ जुड़ने का मौका देगा। चलिए, आगे बढ़ें और अपने नए यात्रा का लुत्फ उठाएं!

4. अपने ब्लॉग के लिए कोई नाम डालें

नाम चुनना: ब्लॉग के लिए एक महत्वपूर्ण चरण

ब्लॉगिंग एक रोमांचक और सृजनात्मक प्रक्रिया है। जब आप अपना ब्लॉग शुरू करते हैं, तो नाम चुनना एक महत्वपूर्ण कदम है। एक अच्छा ब्लॉग नाम आपके ब्लॉग की पहचान को प्रतिबिंबित करता है और पाठकों को आकर्षित करता है।

एक अच्छा ब्लॉग नाम चुनने के लिए, कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दें:

1. प्रासंगिकता: अपने ब्लॉग के विषय या उद्देश्य को प्रतिबिंबित करने वाला नाम चुनें। यह पाठकों को बताएगा कि आप किस बारे में लिख रहे हैं।

2. सरलता: एक सरल और आसानी से याद रखने योग्य नाम चुनें। लंबे या जटिल नाम से बचें।

3. व्यक्तिगत छाप: यदि संभव हो, तो अपने व्यक्तित्व या ब्रांड को प्रतिबिंबित करने वाला नाम चुनें। यह पाठकों को अपने साथ जुड़ने का अवसर देता है।

4. उपलब्धता: अपने चुने गए नाम की उपलब्धता की जांच करें। सुनिश्चित करें कि यह किसी अन्य ब्लॉग या वेबसाइट से न टकराता हो।

5. भविष्य के लिए अनुकूल: अपने ब्लॉग के भविष्य में संभावित विस्तार या विकास को ध्यान में रखें।

अंत में, एक बार जब आप एक नाम चुन लेते हैं तो उसे अच्छी तरह से परखें। यदि वह आपके ब्लॉग के लिए उपयुक्त प्रतीत होता है, तो आगे बढ़ें और अपने ब्लॉग को शुरू करें!

5. आगे बढ़ें पर क्लिक करें

यहां है एक मध्यम लंबाई का, सूचनात्मक शैली में लिखा गया ब्लॉग पोस्ट

इंटरनेट के इस युग में, ब्लॉगिंग एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय माध्यम बन गया है। ब्लॉग लेखन एक ऐसा माध्यम है जिसके माध्यम से आप अपने विचारों, अनुभवों और जानकारी को दुनिया के सामने रख सकते हैं। ये आपको स्वयं को व्यक्त करने और लोगों से जुड़ने का एक शक्तिशाली माध्यम प्रदान करता है।

ब्लॉग लेखन शुरू करने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। कुछ लोग अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ब्लॉग लिखते हैं, तो कुछ अपने शौक या रुचियों को साझा करने के लिए। कुछ लेखक अपने विचारों और अनुभवों को दूसरों के साथ साझा करना चाहते हैं। भले ही आपका उद्देश्य कुछ भी हो, ब्लॉग लेखन आपके लिए एक अच्छा माध्यम साबित हो सकता है। ब्लॉग लेखन शुरू करने से पहले, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने मकसद और लक्ष्य को स्पष्ट रूप से समझें। क्या आप अपने व्यवसाय को बढ़ावा देना चाहते हैं? क्या आप अपने विचारों और अनुभवों को साझा करना चाहते हैं? या फिर आप बस अपनी लिखने की क्षमता को बेहतर करना चाहते हैं? अपने उद्देश्य को स्पष्ट करने से आपको अपने ब्लॉग को कैसे आकार देना है, यह समझने में मदद मिलेगी।

एक बार जब आप अपने उद्देश्य को स्पष्ट कर लें, तो अपने ब्लॉग को शुरू करने के लिए एक अच्छा प्लेटफ़ॉर्म चुनें। WordPress, Blogger और Medium जैसे कई अच्छे ब्लॉग प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध हैं। इन प्लेटफ़ॉर्मों के बारे में अध्ययन करें और वह चुनें जो आपके उद्देश्य और जरूरतों के लिए सबसे अच्छा हो।

अंत में, अपने ब्लॉग को नियमित रूप से अपडेट करना याद रखें। इससे न केवल आपके पाठकों को आकर्षित किया जा सकता है, बल्कि यह आपकी लिखने की क्षमता को भी बेहतर बनाता है। तो क्या आप तैयार हैं? ब्लॉग आगे बढ़ें पर क्लिक करें और अपनी आवाज को दुनिया के सामने रखना शुरू करें!

6. ब्लॉग का पता या यूआरएल चुनें

ब्लॉग का पता या यूआरएल चुनना: सफलता का महत्वपूर्ण कदम

आज के समय में, ऑनलाइन उपस्थिति अपने व्यवसाय या ब्रांड की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। एक प्रभावशाली और याद रखने योग्य ब्लॉग पता या यूआरएल (URL) चुनना इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल आपके ब्लॉग को अधिक सुव्यवस्थित और पेशेवर बनाता है, बल्कि यह आपके ब्रांड की पहचान और समग्र ऑनलाइन उपस्थिति को भी बढ़ावा देता है।

ब्लॉग पते या यूआरएल का चयन करते समय, कई कारकों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि यह आपके ब्लॉग के विषय और सामग्री के साथ संबंधित और संगत है। यह न केवल उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने में मदद करेगा, बल्कि यह खोज इंजनों में भी आपके ब्लॉग को बेहतर रूप से रैंक करने में मदद करेगा। इसके अलावा, ब्लॉग पता या यूआरएल को कुशलतापूर्वक और याद रखने योग्य होना चाहिए। यह उपयोगकर्ताओं को आसानी से याद रखने और पहुँचने में मदद करेगा, जो आपके ब्लॉग की पहुंच और दृश्यता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि यह संक्षिप्त, स्पष्ट और अर्थपूर्ण है।

जब ब्लॉग पता या यूआरएल का चयन करते हैं, तो आपको अपने ब्रांड या व्यवसाय के लिए एक संगत डोमेन नाम भी चुनना होगा। यह न केवल आपके ब्लॉग को अधिक पेशेवर और विश्वसनीय बनाता है, बल्कि यह आपके ब्रांड की पहचान को भी बढ़ाता है। साथ ही, यह खोज इंजनों में आपके ब्लॉग को बेहतर रूप से रैंक करने में भी मदद करता है।

अंत में, ब्लॉग पता या यूआरएल को लचीला और विस्तारशील होना चाहिए। यह आपके ब्लॉग के भविष्य के विस्तार और विकास में मदद कर सकता है। यदि आप अपने ब्लॉग के विषय या ब्रांड में परिवर्तन करते हैं, तो आप अपने ब्लॉग पते या यूआरएल को आसानी से अपडेट कर सकते हैं। समग्र रूप से, ब्लॉग पता या यूआरएल का चयन

करना आपके ब्लॉग और ब्रांड की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल आपके ब्लॉग को अधिक पेशेवर और याद रखने योग्य बनाता है, बल्कि यह आपके ऑनलाइन उपस्थिति और खोज इंजन रैंकिंग को भी बढ़ाता है। इसलिए, ब्लॉग पता या यूआरएल का ध्यानपूर्वक चयन करना महत्वपूर्ण है और यह आपके व्यवसाय की सफलता में अहम भूमिका निभा सकता है।

7. सेव करें पर क्लिक करें

प्रिय पाठकों,

आज हम एक ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं जो हर ब्लॉगर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है - "ब्लॉग को सेव करें पर क्लिक करें"। ब्लॉग लिखना एक बहुत सरल और आसान प्रक्रिया नहीं है। इसमें कई चरण शामिल होते हैं जिन्हें ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, हम ब्लॉग पोस्ट लिखने की प्रक्रिया को समझेंगे। यह एक बहुत ही गहरी और सटीक प्रक्रिया है जो कि आपके ब्लॉग के सफल होने में मददगार होती है। सबसे पहले, आपको एक अच्छा और कैच़दार शीर्षक चुनना होगा जो पाठकों को आकर्षित करे। इसके बाद, आप एक अच्छा और सोचमय विषय-वस्तु तैयार करेंगे जो पाठकों को गहराई से जोड़ सके।

इसके बाद, आपको ब्लॉग पोस्ट को अच्छी तरह से संरचित और संगठित करना होगा। इसमें शामिल हैं - एक प्रभावशाली प्रारंभ, एक विस्तृत मध्य भाग, और एक मजबूत निष्कर्ष। इन तीनों भागों को एक साथ जोड़कर आप एक बेहतरीन ब्लॉग पोस्ट तैयार कर सकते हैं। अब, आपको अपने ब्लॉग पोस्ट को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए कुछ और चीजों पर ध्यान देना होगा। इसमें शामिल हैं - उचित आवरण चित्र का चयन, अच्छी तरह से स्वरूपित और सुंदर लेख, और उचित लिंक और रेफरेंस का उपयोग।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अपने ब्लॉग पोस्ट को सावधानीपूर्वक और बारीकी से सेव करना होगा। क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि आपकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाती और आपका ब्लॉग पोस्ट सही तरीके से प्रकाशित हो जाता है। इसलिए, जब आप अपने ब्लॉग पोस्ट को लिख चुके हों, तो सुनिश्चित करें कि आप उसे सावधानीपूर्वक और बारीकी से सेव करें। यह आपके ब्लॉग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके पोस्ट को सुरक्षित और संरक्षित करता है और यह भी सुनिश्चित करता है कि आप किसी भी प्रकार के डेटा या कंटेंट को खो न दें।

इस प्रक्रिया में, आपको अपने ब्लॉग पोस्ट को सेव करने के लिए एक बार नहीं, बल्कि कई बार क्लिक करना होगा। यह सुनिश्चित करता है कि आपका पोस्ट सुरक्षित है और किसी भी अप्रत्याशित कंप्यूटर या प्रणाली विफलता से प्रभावित नहीं होता है।

अंत में, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि "ब्लॉग को सेव करें पर क्लिक करें" एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है जिसे हर ब्लॉगर को ध्यान में रखना चाहिए। यह आपके ब्लॉग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और यह सुनिश्चित करता है कि आपका कड़ा परिश्रम व्यर्थ नहीं जाता।

तो, अगली बार जब आप अपना ब्लॉग पोस्ट लिख रहे हों, तो याद रखें - "ब्लॉग को सेव करें पर क्लिक करें"। यह आपके ब्लॉग के लिए एक महत्वपूर्ण चरण है जिसे आप कभी नहीं भूल सकते।

शुभकामनाएं!

 


Friday, June 21, 2024

प्राचीन हिन्दू कला और हस्तशिल्प

 

शिल्पशास्त्र

प्राचीन हिन्दू ज्ञान का एक महत्वपूर्ण अंग शिल्पशास्त्र है। शिल्पशास्त्र वे ग्रन्थ हैं जिनमें विविध प्रकार की कलाओं तथा हस्तशिल्पों की डिजाइन और सिद्धान्तों का विवेचन किया गया है। ये ग्रन्थ केवल कला और हस्तशिल्प ही नहींबल्कि उनके पीछे के दार्शनिक और आध्यात्मिक आधार को भी प्रस्तुत करते हैं।शिल्पशास्त्र में चौसठ प्रकार की कलाओं का उल्लेख मिलता हैजिन्हें 'बाह्य कलाकहा जाता है। इनमें काष्ठकारीस्थापत्य कलाआभूषण कलानाट्यकलासंगीतवैद्यकनृत्यकाव्यशास्त्र आदि शामिल हैं। इन कलाओं में से प्रत्येक को गहराई से समझा और सीखा जाता थाताकि उन्हें पूर्णता के साथ प्रदर्शित किया जा सके।

इन 'बाह्य कलाओंके अलावाशिल्पशास्त्र में 'आभ्यन्तर कलाओंका भी उल्लेख हैजो मुख्यतः 'कामया प्रेम से सम्बन्धित हैं। इनमें चुम्बनआलिंगनआदि शामिल हैं। यद्यपि ये सभी विषय आपस में घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैंलेकिन शिल्पशास्त्र में मुख्य रूप से मूर्तिकला और वास्तुशास्त्र पर ध्यान दिया गया है। मूर्तिकला में मूर्तियों के आकारआयामस्थापनाप्रतिष्ठापनपूजन और प्रतिष्ठापन की विधियों का वर्णन है। वास्तुशास्त्र में भवनोंदुर्गोंमंदिरोंआवासों आदि के निर्माण के सिद्धान्तों और प्रक्रियाओं का वर्णन है।

शिल्पशास्त्र में इन कलाओं के साथ-साथ उनके पीछे के दार्शनिक और आध्यात्मिक आधार को भी समझाया गया है। ये ग्रन्थ केवल कला और हस्तशिल्प की तकनीकी जानकारी ही नहीं देतेबल्कि उनके पीछे के दर्शन और विश्वदृष्टि को भी प्रस्तुत करते हैं। इससे कलाकारों को न केवल तकनीकी ज्ञानबल्कि कला के गहरे आध्यात्मिक आयाम को भी समझने में मदद मिलती है। शिल्पशास्त्र का अध्ययन न केवल कला और हस्तशिल्प के क्षेत्र मेंबल्कि दर्शनज्योतिषवास्तुशास्त्रनृत्यसंगीत और अन्य परंपरागत ज्ञानों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण है। ये ग्रन्थ प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान का एक महत्वपूर्ण पहलू हैंजिनका अध्ययन कर हम अपने सांस्कृतिक विरासत को और गहराई से समझ सकते हैं।

वास्तु-शास्त्रीय ग्रंथों का महत्व

वास्तुशास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसमें स्थापत्यगृह निर्माणनगर योजना और अन्य संबंधित क्षेत्रों पर व्यापक जानकारी दी गई है। इस प्राचीन विद्या में लगभग 350 से अधिक ग्रंथों का वर्णन मिलता हैजिनमें से कुछ प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख नीचे किया गया है।

प्रमुख वास्तु-शास्त्रीय ग्रंथ और प्रमुख ग्रंथ

1. मानसार: यह एक प्रमुख वास्तुशास्त्रीय ग्रंथ है जिसमें स्थापत्यगृह निर्माणनगर योजना और अन्य संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई है। यह ग्रंथ लगभग 11वीं शताब्दी में लिखा गया था और वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

2. शिल्पशास्त्र: यह एक प्राचीन वास्तुशास्त्रीय ग्रंथ है जिसमें मंदिरोंमहलों और अन्य भवनों के निर्माण से संबंधित जानकारी दी गई है। यह ग्रंथ लगभग 8वीं शताब्दी में लिखा गया था और वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

3. अपराजितप्रच्छा: यह एक प्राचीन वास्तुशास्त्रीय ग्रंथ है जिसमें भवनोंमंदिरों और अन्य संरचनाओं के निर्माण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है। यह ग्रंथ लगभग 8वीं शताब्दी में लिखा गया था और वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

4. मयमत: यह एक प्राचीन वास्तुशास्त्रीय ग्रंथ है जिसमें भवनोंमंदिरों और अन्य संरचनाओं के निर्माण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है। यह ग्रंथ लगभग 7वीं शताब्दी में लिखा गया था और वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

5. विष्णुधर्मोत्तर पुराण: यह एक प्राचीन वास्तुशास्त्रीय ग्रंथ है जिसमें भवनोंमंदिरों और अन्य संरचनाओं के निर्माण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है। यह ग्रंथ लगभग 6वीं शताब्दी में लिखा गया था और वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

इन प्रमुख ग्रंथों के अलावावास्तुशास्त्र के क्षेत्र में कई अन्य ग्रंथों का भी उल्लेख किया जाता हैजैसे कि वास्तुविद्यामार्कण्डेय पुराणब्रह्माण्ड पुराणअग्नि पुराण और कांशिकाविवरण आदि। ये सभी ग्रंथ वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और इस प्राचीन विज्ञान को समझने में मदद करते हैं।

वास्तुशास्त्र एक विशाल और गहन विषय है जिसमें भवनोंमंदिरोंनगरों और अन्य संरचनाओं के निर्माण से संबंधित सिद्धांत और तकनीकों का वर्णन किया गया है। इन ग्रंथों में दी गई जानकारी वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान और अध्ययन करने वालों के लिए बहुत उपयोगी है। ये ग्रंथ न केवल प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का प्रतिनिधित्व करते हैंबल्कि इनमें दी गई जानकारी आज भी प्रासंगिक और उपयोगी है।

विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र का व्यापक और महत्वपूर्ण ग्रंथ

वास्तुशास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जिसका इतिहास गहरा और परंपरागत है। इस विषय पर अनेक ग्रंथों और शास्त्रों का विकास हुआ हैजिनमें से एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है - विश्वकर्मा प्रकाश। यह ग्रंथ वास्तुशास्त्र के विविध पहलुओं को व्यापक रूप से कवर करता है और वास्तुकारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ माना जाता है। विश्वकर्मा प्रकाश में कुल 13 अध्याय हैं

जिनमें से प्रत्येक अध्याय वास्तुशास्त्र के किसी विशिष्ट पहलू को कवर करता है। ये अध्याय हैं:

1. भूमिलक्षण: इस अध्याय में भूमि के प्रकारगुण और चयन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।

2. गृह्यादिलक्षण: यह अध्याय गृह और अन्य वास्तुकला संबंधी लक्षणों को समझाता है।

3. मुहुर्त: इस अध्याय में शुभ मुहूर्तों और घड़ियों के चयन के बारे में जानकारी दी गई है।

4. गृहविचार: यह अध्याय घर के निर्माण और आकार-आकृति के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

5. पदविन्यास: इस अध्याय में वास्तुकला में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न पदों और उनके स्थान के बारे में बताया गया है।

6. प्रासादलक्षण: यह अध्याय महलमंदिर और अन्य प्रासादों के लक्षणों और निर्माण प्रक्रिया को समझाता है।

7. द्वारलक्षण: इस अध्याय में द्वारों के प्रकारआकार और स्थान के बारे में जानकारी दी गई है।

8. जलाशयविचार: यह अध्याय कुंडोंतालाबों और अन्य जलाशयों के चयन और निर्माण के बारे में बताता है।

9. वृक्ष: इस अध्याय में वृक्षों के प्रकारगुण और उनके उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई है।

10. गृहप्रवेश: यह अध्याय नए घर में प्रवेश करने के लिए शुभ मुहूर्तों और रीति-रिवाजों के बारे में बताता है।

11. दुर्ग: इस अध्याय में किलों और किले के निर्माण के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।

12. शाल्योद्धार: यह अध्याय पुराने या क्षतिग्रस्त वास्तु-संरचनाओं के पुनर्निर्माण और उद्धार के बारे में जानकारी देता है।

13. गृहवेध: इस अध्याय में घर के विभिन्न हिस्सों में की जाने वाली वेध क्रियाओं के बारे में बताया गया है।

विश्वकर्मा प्रकाश का यह व्यापक विषय-वस्तु वास्तुशास्त्र के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है और वास्तुकारोंशिल्पकारों और स्थापत्य विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है। इस ग्रंथ में दिए गए सिद्धांत और दिशा-निर्देश भारतीय वास्तुकला परंपरा को समझने और उसका अनुसरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माण्डविक वास्तुशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रन्थ "मयमतम्" कुल 36 अध्यायों पर विस्तृत है। इस ग्रन्थ में वास्तुशास्त्र के विविध पहलुओं को व्यापक रूप से समझाया गया है।

नीचे दिए गए है इन 36 अध्यायों के नाम और संक्षिप्त विवरण:

1. संग्रहाध्याय: वास्तुशास्त्र के मूलभूत सिद्धान्तों का वर्णन।

2. वास्तुप्रकार: वास्तु के प्रकारों का वर्णन।

3. भूपरीक्षा: भूमि की जाँच और परीक्षण विधि का वर्णन।

4. भूपरिग्रह: भूमि का अधिग्रहण और उपयोग विधि का वर्णन।

5. मनोपकरण: वास्तु निर्माण में मन की भूमिका का वर्णन।

6. दिक्-परिच्छेद: दिशाओं के महत्व और उनका वर्णन।

7. पाद-देवता-विन्यास: वास्तु में देवताओं के स्थानों का वर्णन।

8. बालिकर्मविधान: वास्तु निर्माण में बालिकाओं की भूमिका का वर्णन।

9. ग्रामविन्यास: ग्रामीण वास्तु विन्यास का वर्णन।

10. नगरविधान: नगरीय वास्तु विन्यास का वर्णन।

11. भू-लम्ब-विधान: भूमि के आयाम और उनका वर्णन।

12. गर्भन्यासविधान: वास्तु के गर्भगृह का वर्णन।

13. उपपित-विधान: वास्तु के उपपीठ का वर्णन।

14. अधिष्ठान विधान: वास्तु के आधारस्तम्भ का वर्णन।

15. पाद-प्रमान-द्रव्य-संग्रह: वास्तु के पाद (स्तम्भ) और सामग्री का वर्णन।

16. प्रस्तर प्रकरण: वास्तु में प्रस्तर (पत्थर) का उपयोग और विधि का वर्णन।

17. संधिकर्मविधान: वास्तु के संधि (जोड़) कार्य का वर्णन।

18. शिखर-करण-विधान: वास्तु के शिखर का निर्माण विधि का वर्णन।

19. समाप्ति-विधान: वास्तु निर्माण की समाप्ति विधि का वर्णन।

20. एक-भूमि-विधान: एक मंजिला वास्तु का वर्णन।

21. द्वि-भूमि-विधान: दो मंजिला वास्तु का वर्णन।

22. त्रि-भूमि-विधान: तीन मंजिला वास्तु का वर्णन।

23. बहु-भूमि-विधान: बहु मंजिला वास्तु का वर्णन।

24. प्रकर-परिवार: वास्तु के प्रकरों (अंगों) का वर्णन।

25. गोपुर-विधान: वास्तु के गोपुर (द्वार) का वर्णन।

26. मण्डप-विधान: वास्तु के मण्डप (मंडप) का वर्णन।

27. शाला-विधान: वास्तु की शाला (हॉल) का वर्णन।

28. गृहप्रवेश: वास्तु में गृह प्रवेश का वर्णन।

29. राज-वेस्म-विधान: राजवास (महल) का वर्णन।

30. द्वार-विधान: वास्तु के द्वार का वर्णन।

31. यानाधिकार: वास्तु में वाहन का उपयोग और स्थान का वर्णन।

32. यान-शयनाधिकार: वास्तु में वाहन और शयन स्थल का वर्णन।

33. लिंगलक्षण: वास्तु में शिव लिंग का वर्णन।

34. पीठलक्षण: वास्तु में देवी पीठ का वर्णन।

35. अनुकर्म-विधान: वास्तु निर्माण कार्य का क्रमानुसार वर्णन।

36. प्रतिमालक्षण: वास्तु में मूर्तियों का वर्णन।

इस प्रकार "मयमतम्" वास्तुशास्त्र के विविध पहलुओं को व्यापक रूप से समझाता है और वास्तु निर्माण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह ग्रन्थ प्राचीन भारतीय वास्तुकला का महत्वपूर्ण एवं व्यापक दस्तावेज है।

नारद शिल्पशास्त्र के अध्यायों के नाम- ग्रन्थारम्भः

1. कल्पादौ वर्षधारा

2. जनकृतदेवस्तुतिः

3. नारदागमनम्

4. वास्तुपुरुषस्वरूपम्

5. भवनयोग्यभूमिस्वरूपम्

6. ग्रामसीमालक्षणम्

7. ग्रामस्थलसमीकरणम्

8. मार्गलक्षणम्

9. जलाशयतटाकलक्षणम्

10. प्रणालीसेतुनिर्माणम्

11. आयादिप्रमाणलक्षणम्

12. दशविधग्रामलक्षणम्

13. ग्रामः

14. महाग्रामः

15. ब्रह्मपथग्रामः

16. शाङ्करग्रामः

17. वासवग्रामः

18. संकीर्णग्रामः

19. मुखभद्रग्रामः

20. मङ्गलग्रामः

21. शुभग्रामः

22. नगरनिर्माणम्

23. प्रस्तरनगरम्

24. निगमनगरम्

25. पट्टणम्

26. सर्वतोभद्रनगरम्

27. कार्मुकनगरम्

28. स्वस्तिकनगरम्

29. चतुर्मुखनगरम्

30. अष्टमुखनगरम्

31. वैजयन्तपुरम्

32. भूपालनगरम्

33. देवेशनगरम

34. पुरन्दरनगरम्

35. श्रीनगरम्

36. पंचविधदुर्गाणि

37. गिरिदुर्गम्

38. जलदुर्गम्

39. वाहिनीदुर्गम्

40. युद्धदुर्गम्

41. संकीर्णनगरम्

42. ग्रामनगरवीथीप्रमाणम्

43. ग्रामगृहम

44. नगरसदनप्रमाणम्

45. क्षत्रियप्रासादः

46. राजभवनद्वारम्

47. महिषीभवनद्वारशाला

48. विवाहशाला

49. भूमिलंबः

50. भित्तिः

51. अधिष्ठानम्

52. उपपीठम्

53. स्तंभलक्षणम्

54. भौमभित्तिः

55. सन्धिकर्म ,

56. तिर्यकदारुकम्

57. चन्द्रशाला

58. शिखरकलशम्

59. भौमान्तर्गेहम्

60. शयनशाला

61. भोजनशाला

62. नानागेहानि

63. चत्वरम्

64. नीतिशाला

65. नाटकशाला

66. चित्रशाला

67. वातायनलक्षणम्

68. डोलालक्षणम

69. पर्यकशिबिकालक्षणम्

70. सिंहासनम्

71. चित्रालंकृतिः

72. देवालयबलिकर्म

73. दैवगर्भविन्यासः

74. गर्भगृहम्

75. गोपुरकल्पनम्

76. प्राकारकल्पनम्

77. मण्टपलक्षणम्

78. बलिपीठम्

79. ध्वजस्तंभः

80. देवबिम्बनिर्माणम्

81. बिम्बपीठम

82. गृहप्रवेश:

83. नानायाननिर्माणम्

नारद शिल्पशास्त्र का एक महत्वपूर्ण प्राचीन भारतीय ग्रंथ है जो वास्तुशास्त्र से संबंधित है। इस ग्रंथ में वास्तु और शिल्प कला के विविध पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई है।  नारद शिल्पशास्त्र का यह अध्याय-सूची भारतीय वास्तुकला के अनमोल धरोहर को प्रदर्शित करती है। इसमें शिल्प और वास्तु कला के व्यापक क्षेत्रों को समेटने वाले 83 अध्यायों का उल्लेख किया गया है। इन अध्यायों में ग्रामनगरमहलमंदिरप्रासाददुर्ग और अन्य संरचनाओं के निर्माण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है।

प्रथम अध्याय 'कल्पादौ वर्षधारासे शुरू होकर अंतिम अध्याय 'नानायाननिर्माणम्तक इस ग्रंथ में वास्तुकला के सर्वोत्तम प्रमाण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध है। इन अध्यायों में वर्णित विषयों में भूमि चयननिर्माणसंरचनाआकृतिगठनसजावट और अनुष्ठान जैसे पहलू शामिल हैं।

नारद शिल्पशास्त्र हमारी वास्तुकला परंपरा का अमूल्य आधार है। इसमें वर्णित विविध प्रकार के ग्रामनगरमहलमंदिर आदि के निर्माण से संबंधित नियम और प्रक्रियाएं भारतीय वास्तुकला के अभिन्न अंग हैं। यह ग्रंथ शिल्पीवास्तुकारइतिहासकार और शोधार्थी के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ है।

 

 

 

 


"सुखद भविष्य

 तकनीकी के रंग" - यह शीर्षक तकनीकी विकास के सकारात्मक और कलात्मक पहलुओं को दर्शाता है। यह भविष्य की सुंदरता और तकनीक के सहयोग से जिन्दग...